केरल आयुर्वेद में बीमारी का इलाज नाड्डी देख के किया जाता है। | केरल आयुर्वेद में बीमारी का इलाज नाड्डी देख के किया जाता है। | केरल आयुर्वेद में बीमारी का इलाज नाड्डी देख के किया जाता है। | केरल आयुर्वेद में बीमारी का इलाज नाड्डी देख के किया जाता है। | केरल आयुर्वेद में बीमारी का इलाज नाड्डी देख के किया जाता है। | केरल आयुर्वेद में बीमारी का इलाज नाड्डी देख के किया जाता है। | केरल आयुर्वेद में बीमारी का इलाज नाड्डी देख के किया जाता है। | केरल आयुर्वेद में बीमारी का इलाज नाड्डी देख के किया जाता है। | केरल आयुर्वेद में बीमारी का इलाज नाड्डी देख के किया जाता है। | केरल आयुर्वेद में बीमारी का इलाज नाड्डी देख के किया जाता है। | केरल आयुर्वेद में बीमारी का इलाज नाड्डी देख के किया जाता है। | केरल आयुर्वेद में बीमारी का इलाज नाड्डी देख के किया जाता है। |

पित्त दोष क्या है : असंतुलित पित्त से होने वाले रोग, लक्षण और उपाय क्या आपके शरीर से भी बहुत तेज दुर्गंध आती है? या आप बहुत जल्दी गुस्सा हो जाते हैं तो जान लें कि ये सारे लक्षण पित्त प्रकृति के हैं। ऐसे लोग जिनमें पित्त दोष ज्यादा पाया जाता है वे पित्त प्रकृति वाले माने जाते हैं। इस लेख में हम आपको पित्त प्रकृति के गुण, लक्षण और इसे संतुलित करने के उपायों के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

पित्त दोष क्या है?

पित्त दोष ‘अग्नि’ और ‘जल’ इन दो तत्वों से मिलकर बना है। यह हमारे शरीर में बनने वाले हार्मोन और एंजाइम को नियंत्रित करता है। शरीर की गर्मी जैसे कि शरीर का तापमान, पाचक अग्नि जैसी चीजें पित्त द्वारा ही नियंत्रित होती हैं। पित्त का संतुलित अवस्था में होना अच्छी सेहत के लिए बहुत ज़रूरी है। शरीर में पेट और छोटी आंत में पित्त प्रमुखता से पाया जाता है।

ऐसे लोग पेट से जुड़ी समस्याओं जैसे कि कब्ज़, अपच, एसिडिटी आदि से पीड़ित रहते हैं। पित्त दोष के असंतुलित होते ही पाचक अग्नि कमजोर पड़ने लगती है और खाया हुआ भोजन ठीक से पच नहीं पाता है। पित्त दोष के कारण उत्साह में कमी होने लगती है साथ ही ह्रदय और फेफड़ों में कफ इकठ्ठा होने लगता है। इस लेख में हम आपको पित्त दोष के लक्षण, प्रकृति, गुण और इसे संतुलित रखने के उपाय बता रहे हैं।

शरीर में इनके निवास स्थानों और अलग कामों के आधार पर पित्त को पांच भांगों में बांटा गया है.
  • पाचक पित्त
  • रज्जक पित्त
  • साधक पित्त
  • आलोचक पित्त
  • भ्राजक पित्त
  • अकेले पित्त के प्रकोप से 40 रोग

पित्त बढ़ने के कारण:

जाड़ों के शुरूआती मौसम में और युवावस्था में पित्त के बढ़ने की संभावना ज्यादा रहती है। अगर आप पित्त प्रकृति के हैं तो आपके लिए यह जानना बहुत ज़रूरी है कि आखिर किन वजहों से पित्त बढ़ रहा है। आइये कुछ प्रमुख कारणों पर एक नजर डालते हैं।

चटपटे, नमकीन, मसालेदार और तीखे खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन ज्यादा मेहनत करना, हमेशा मानसिक तनाव और गुस्से में रहना अधिक मात्रा में शराब का सेवन

  1. ज्यादा सेक्स करना
  2. >तिल का तेल,सरसों, दही, छाछ खट्टा सिरका आदि का अधिक सेवन
  3. ऊपर बताए गए इन सभी कारणों की वजह से पित्त दोष बढ़ जाता है। पित्त प्रकृति वाले युवाओं को खासतौर
  4. पर अपना विशेष ध्यान रखना चाहिए और इन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

पित्त बढ़ जाने के लक्षण :

जब किसी व्यक्ति के शरीर में पित्त दोष बढ़ जाता है तो कई तरह के शारीरिक और मानसिक लक्षण नजर आने लगते हैं। पित्त दोष बढ़ने के कुछ प्रमुख लक्षण निम्न हैं।

  1. बहुत अधिक थकावट, नींद में कमी
  2. शरीर में जलन और पसीना
  3. त्वचा गाढ़ी होना
  4. अंगों से दुर्गंध
  5. बेहोशी, चक्कर
  6. कड़वा स्वाद
  7. ठंडी चीज खाने का मन
  8. त्वचा, नाखून, आंखें पीली

विरेचन

बढे हुए पित्त को शांत करने के लिए विरेचन (पेट साफ़ करने वाली औषधि) सबसे अच्छा उपाय है। वास्तव में शुरुआत में पित्त आमाशय और ग्रहणी (Duodenum) में ही इकठ्ठा रहता है। ये पेट साफ़ करने वाली औषधियां इन अंगों में पहुंचकर वहां जमा पित्त को पूरी तरह से बाहर निकाल देती हैं।

पित्त को संतुलित करने के लिए क्या खाएं

अपनी डाइट में बदलाव लाकर आसानी से बढे हुए पित्त को शांत किया जा सकता है. आइये जानते हैं कि पित्त के प्रकोप से बचने के लिए किन चीजों का सेवन अधिक करना चाहिए.

  1. घी का सेवन
  2. हरी सब्जियाँ
  3. सभी दालें
  4. एलोवेरा, अंकुरित अनाज

पित्त प्रकृति वाले लोगों को क्या नहीं खाना चाहिए

खाने-पीने की कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिनके सेवन से पित्त दोष और बढ़ता है। इसलिए पित्त प्रकृति वाले लोगों को इन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

  1. मूली, काली मिर्च, कच्चा टमाटर
  2. तिल और सरसों का तेल
  3. काजू, मूंगफली, अखरोट
  4. कॉफी, शराब, खट्टे जूस

पित्त बढ़ने से कौन कौन से रोग होते हैं?

पित्त दोष (Pitta Dosha) वाले लोगों को पेट में एसिडिटी और कब्ज (Acidity and Constipation ) की समस्या बनी रहती है. पित्त दोष होने पर खाना अच्छी तरह से डायजेस्ट नहीं हो पाता है. स्वस्थ रहने के लिए शरीर में पित्त का संतुलन होना जरूरी है. ऐसे लोगों को खाने में ठंडी और मीठी चीजों का सेवन करना चाहिए.

  1. सिर दर्द
  2. गर्दन संबंधी रोग
  3. पीलिया
  4. स्किन रोग
  5. मधुमेह और पैनक्रियाज रोग
  6. नाभि के आसपास मरोड़
  7. स्वप्न दोष (पुरुष)
  8. महिलाओं में पीरियड, ल्यूकोरिया समस्याएं